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रविवार, 27 अक्टूबर 2019

Diwali special


DIWALI SPECIAL  BY DEEPAK NAYAK
कार्तिक अमावस्या को मनाया जाने वाला प्रमुख भारतीय त्यौहार

दीपावलीदिवाली या दीवाली शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार है।[2][3] दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है जो ग्रेगोरी कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह 'अन्धकार पर प्रकाश की विजय' को दर्शाता है।[4][5][6]
दीवाली
The Rangoli of Lights.jpg
रंगीन पाउडर का प्रयोग कर रंगोली सजाना दीवाली में काफी प्रसिद्ध है
अन्य नामदीपावली
अनुयायीहिन्दूसिखजैन और बौद्ध [1]
उद्देश्यधार्मिक निष्ठा, उत्सव
उत्सवदिया जलना, घर की सजावट, खरीददारी, आतिशबाज़ी, पूजा, उपहार, दावत और मिठाइयाँ
आरम्भधनतेरस, दीवाली से दो दिन पहले
समापनभैया दूज, दीवाली के दो दिन बाद
तिथिकार्तिक माह की अमावस्या
समान पर्वकाली पूजादीपावली (जैन)बंदी छोड़ दिवस
भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्हात् (हे भगवान!) मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाइए। यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिखबौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं[7][8] तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।
माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे।[9] अयोध्यावासियों का हृदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीवाली यही चरितार्थ करती है- असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ-सुथरा कर सजाते हैं। बाजारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाजार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।
दिवाली उत्सव
Deepawali-festival.jpg
नर्क चतुर्दशी की रात्रि पर घर के अंदर दिये से की गयी सजावट
Glowing Swayambhu (3005358416).jpg
दिवाली(तिहार) के लिये रोशन एक नेपाली मन्दिर
Diwali fireworks and lighting celebrations India 2012.jpg
अमृतसर में दिवाली उत्सव
Fireworks Diwali Chennai India November 2013 b.jpg
दिवाली की रात में चेन्नई के ऊपर आतिशबाज़ी
Ganga At Nibi Gaharwar.jpg
ग्रामीण उत्सव – गंगा नदी में तैरता दिया
Sweets Mithai for Diwali and other Festivals of India.jpg
दिवाली "मिठाई"

दिवाली नज़ारों, आवाज़ों, कला, और स्वाद का त्योहार है। जिसमें प्रांतानुसार भिन्नता पायी जाती है।







Last ediBy  Deepak Nayak ted 12By hours ago by Nikesh kumar ji

रविवार, 26 मई 2019

कब मिलेगा शहीद राजेंद्र सिंह भाटी को सम्मान ।

बाॅवरला,जोधपुर,
राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर करने वाले शहीद राजेंद्र सिंह अपने ही गांव बावरला में स्थित विद्यालय का छात्र रहा था । अपना अध्ययन काल पूर्ण करने के बाद राजेंद्र सेना में भर्ती हुआ। आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए । राज्य सरकार के आदेश के बावजूद ग्राम में एक मात्र विद्यालय जिसका नामांकन शहीद के नाम होना था। परंतु आज भी शहीद के नाम विद्यालय का नामांकन नहीं हुआ परिवारजन व ग्रामीण आए दिन विद्यालय के नामकरन को लेकर जिला कलेक्टर आदि के समक्ष पेश हुए हैं। पर इसका कोई हल नहीं निकला आखिर भवानी सिंह भाटी ने जी मीडिया के माध्यम से एक मुहिम चलाई देखो क्या जी मीडिया दिला पाएगा शहीद को समान

Thank you for like my website

My self
Name Deepak bhil
Class 8
Govt.sen.sec.school banwarla
V/p bawarla jodhpur 342027

बुधवार, 20 मार्च 2019

HOLI

                    HOLI
Hello friends,
आपको मेरी तरफ से होली की हार्दिक शुभकामनाएं


आज होली दहन है। होली भारत में मनाये जाने वाला लोकप्रिय त्यौहार है।जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।यह त्यौहार रंगों का त्यौहार है।इसमें लोगों को गुलाल या रंगों की पानी पिचकारी से खेला जाता है।
 यह त्यौहार  मनाने की एक कहानी है ।
यह कहानी प्रलाद नाम के बालक की है।जो विष्णु भगवान का भक्त था।उसके पिता दानवों के राजा थे।वह विष्णु को नही मानते थे।उस दानव का नाम हरिंकर्षप था।जब उसको पता चला तो वह अपने बेटे को मारने की कोशिश करने लगा फिर भी  वह नहीं जीत सका।उसकी बहन होलीका थी।जिसे बाह्मा का वरदान था की वह आग में नहीं जलने की।उसने सोचा कि मैं प्रह्लाद के साथ आग पर बैठ जाऊ और प्रह्लाद  जल जाए।
यह भी कोशिश विष्णु भगवान ने  विफल कर दी और होलीका जल गए।और विष्णु भगवान नरसिंहा के अवतार मे हरिंकर्षप को मार डाला। इसी खुशी में होली मनायी जाती ।
HAPPY HOLI